मंत्रदीक्षा से बदली जीवन की दिशा !

कौन कहता है कि सच्चे सदगुरु से ली गयी मंत्रदीक्षा जिन्दगी की दिशा नहीं बदलती ? मेरा नाम डॉ. जौहरी लाल है। मैं जालन्धर की बस्ती बावा खेल में क्लीनिक चलाता हूँ। जब मैंने गुरुदेव से दीक्षा नहीं ली थी तो मरीज को अस्पताल भेजने के बदले मुझे कमीशन मिलता था वह इस तरह हैः

हार्ट ऑपरेशन – 25000 रुपये
एम.आर.आई.– 2000 रुपये
सी.टी.स्केन – 800 रुपये
अल्ट्रा साउंड – 200 रुपये

इसके अलावा लैबोरेटरी के जितने भी जाँच हैं उनका 50 % क्लीनिक में दे जाते थे। 27 सितम्बर 1997 को परम पूज्य बापू जी से मंत्रदीक्षा लेने के बाद जीवन की दिशा ही बदल गयी। सितम्बर 2001 से पूनम व्रत लेने से जिन्दगी में खान-पान, रहन-सहन में और भी निखार आया। अब किसी मरीज को मैं किसी अस्पताल में भेजता हूँ तो उसकी पर्ची पर पहले ही 50 % लैस करके लिख देता हूँ। साथ में मरीज को भी बता देता हूँ कि इतने ही पैसे देना। गुरुकृपा से मैं ओ.पी.डी. में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज देख लेता हूँ। जब कमीशन लेता था तो मन में अजीब सी चुभन होती थी लेकिन अब पाप जोर नहीं मारते। गरीब मरीज की सहायता करके विशेष आनन्द का अनुभव होता है। यह सब सदगुरु की कृपा से ही संभव है। यह मंत्रदीक्षा का असर है।
मैं परम पूज्य बापू जी को कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ, जिन्होंने मुझे जीवन जीने का सच्चा मार्ग दिखाया।

डॉ. जौहरी लाल, जालन्धर
ऋषि प्रसाद, अंक 165, सितम्बर 2006, पृष्ठ संख्या 31

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मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं…..

मेरे पुत्र दिव्येश कुमार (उम्र 16 वर्ष) को बचपन से कुछ सुनायी नहीं देता था। कई एलोपैथिक दवाइयाँ की परंतु कुछ भी लाभ नहीं हुआ। मुझे कुछ साधकों द्वारा पता चला कि गुरुदेव ने ओंजल आश्रम के बड़ बादशाह पर शक्तिपात करते समय कहा था कि इस बड़ बादशाह (कल्पवृक्ष) की जटाओं का रस कान में डालने से बहरापन मिट जायेगा। संतों के प्रति श्रद्धा-भक्ति से युक्त होकर उनके वचनों में दृढ़तापूर्वक विश्वास किया जाय तो प्रकृति भी सेवा करने को राजी हो जाती है, इसका मैंने प्रत्यक्ष अनुभव किया। मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं….
अर्थात् ब्रह्मनिष्ठ सदगुरूदेव के श्रीमुख से उच्चारित वाक्य मंत्र के समान होते हैं – यह जो शास्त्र वचन हैं, वह परम सत्य है, बस आपमें गुरू-वाक्य के प्रति दृढ़ श्रद्धा होनी चाहिए। हमने बड़ बादशाह की जटाओं का रस दिव्येश के कानों में डाला। बचपन से कुछ न सुन पाने वाले मेरे बेटे ने जब पहली आवाज सुनी तो वह हर्ष से गदगद हो गया। हमारे पूरे परिवार का हृदय पूज्य बापू जी के प्रति अहोभाव से भर गया। सबके दुःख हर लेने वाले निःस्वार्थ हितैषी भगवत्स्वरूप गुरूदेव को मेरे कोटि-कोटि प्रणाम !

धनजीभाई पटेल
भिनार, जिला. नवसारी (गुजरात)
स्रोतः ऋषि प्रसाद, अंक 198, जून 2009, पृष्ठ संख्या 30

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‘मंशा पूरी करते हैं ये मुर्शिद !’

एक सुबह मैं सोनी टी.वी. पर पूज्य बापू जी का सत्संग सुन रहा था। गुरुदेव ने कहाः ‘जो गुटखा या पान मसाला खाते हों, वे हाथ ऊपर करें। मैं शंख बजाऊँगा तो उनका व्यसन छूट जायेगा।’ मैं सादा पान मसाला खाता था। मेरा हाथ अपने आप ऊपर उठ गया और गुरुदेव ने शंख बजा दिया। उस दिन से आज तक मुझे इच्छा ही नहीं हुई की मैं पान मसाला खाऊँ। ऐसी है मेरे गुरुदेव की कृपा !
मेरे भाई की शादी को 18 साल हो गये लेकिन उन्हें संतान नहीं हुई, वे रो रहे थे। मैंने उन्हें कहाः ‘मेरी बेटी को आप गोद ले लो।’ उन्होंने कहा कि ‘आपकी पहली संतान है, इसे आप ही रखो।’ तब मैंने कहाः ‘अब जो बच्चा होगा, वह आप ले लेना।’ फिर मुझे लड़का हुआ जो मैंने उन्हें दे दिया। मुझे एक पंडित जी ने कहा कि ‘तुम्हारी हस्तरेखा के अनुसार तुम्हारे भाग्य में तो दो ही बच्चे हैं, फिर तुमने अपना बच्चा भाई को क्यों दे दिया, मैंने कहाः ‘कोई बात नहीं, मुझे मेरे रब व गुरुदेव पर पूरा भरोसा है।’ मैंने बड़ बादशाह पर कलावा बाँध दिया और प्रार्थना की। जनवरी 2003 में हमें पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई।

इस दिलबर को जो दिल से पुकारते है,
उनकी मंशा पूरी करते हैं ये मुर्शिद !

प्रेम अलवाड़ी, दिल्ली फोन न. 7058863
ऋषि प्रसाद, पृष्ठ संख्या 30, अंक 129, सितम्बर 2003
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महापाप से बचाकर ईश्वर के रास्ते लगाया

जब हमने दीक्षा नहीं ली थी तब घर में पूज्य बापू जी का एक कैलेण्डर लगा हुआ था। मुझे एक बेटा और एक बेटी है तो तीसरी संतान नहीं चाहिए थी। इसलिए गर्भ रहा तो हम पाप के रास्ते जाकर उसे निकालना चाहते थे। रात में पूज्य बापू जी सपने में आये और बोलेः “ऐसा काम मत कर। यह बड़ा पाप है। ” मैंने सोचा, ‘पहले कभी इस प्रकार इनके दर्शन नहीं किये। टी.वी. पर तथा कैलेण्डर में इन्हें देखा था। उस दिन तो हम रुक गये परंतु सोचा कि ‘चलो, लड़का है या लड़की इसकी जाँच करें।’ दूसरे दिन सुबह चार बजे पूज्य बापू जी सपने में आकर बोलेः ‘लड़की ही है, तू पाप नहीं करेगी।’ और हम गर्भपात के महापाप से बच गये। हम 9 महीने तक पूज्य बापू जी की किताबें तथा ज्ञानेश्वरी, दासबोध आदि ग्रंथ पढ़ते रहे। 9 महीने टी.वी., फिल्मी प्रोग्राम भी नहीं देखा। पूज्य बापू जी के वचन सत्य हुए। मैंने एक कन्या को जन्म दिया और गुरुदेव के निर्दशानुसार 9 महीने बिताने का परिणाम यह हुआ कि मेरी कन्या में जन्मजात भक्ति के संस्कार देखने को मिले एवं उसके जीवन में कई चमत्कारिक घटनाएँ भी घटीं। कैसी लीला है गुरुवर की कि हमें गर्भपात के महापाप से बचाकर ईश्वर के रास्ते लगाया ! अब तो हमारे परिवार के सभी लोग मंत्रदीक्षित हैं। धन्य हैं गुरुवर और उनकी लीलाएँ ! ऐसे गुरुवर के चरणों में

कोटि-कोटि वंदन…..

सौ. विजया प्रह्लाद अंभोरे,
नांदेड़ (महाराष्ट्र)
ऋषि प्रसाद, दिसम्बर 2006, पृष्ठ संख्या 29. अंक 168

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‘मामरा बादाम मिश्रण’ का चमत्कारिक प्रभाव

मैं आज यह जानकर अत्यंत हर्ष का अनुभव कर रही हूँ कि मेरे चश्मे का नं + 4 से घटकर – 2 हो गया है। मैं इस चमत्कार का पूर्ण श्रेय निःसंदेह ‘श्री योग वेदांत सेवा समिति’ द्वारा निर्मित ‘मामरा बादाम मिश्रण’ को दूँगी। 1997 में ‘के.जी.एम.सी.’ के डॉक्टरों ने मेरी आँखों का परीक्षण कर पूरे विश्वास के साथ कह दिया था कि “जीन्स का असर होने के कारण आपके चश्मे का नंबर घटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। बस, चश्मे का नंबर यही रहे, बढ़े नहीं तो भी आप समझियेगा कि आप पर बड़ी कृपा है।” परंतु गत दो महीने पूर्व एक साधक श्री राम आशीष जी ने मुझे ‘मामरा बादाम मिश्रण’ के नियमित सेवन का परामर्श दिया। उनका परामर्श मानते हुए मैंने इसका प्रतिदिन 10 ग्राम की मात्रा में दो महीने तक सेवन किया। इसके फलस्वरूप मेरे चश्मे के नंबर में आश्चर्यजनक कमी हुई।
बापू जी के चरणकमलों में शत-शत नमन।

अपर्णा तिवारी, 567/162, आनंद नगर, बरदा रोड, लखनऊ
ऋषि प्रसाद, जनवरी 2005, अंक 145, पृष्ठ संख्या 31

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मिटी कष्टों की तपन

सन् 2001 में मुझे पूज्य बापू से दीक्षा लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 29 जुलाई 2003 की शाम को एक ट्रक एवं बस के बीच में आकर मेरा एक्सीडेंट हो गया। मेरी छाती की कुल 19 हड्डियाँ टूट गयीं एवं गले के नीचे की दाहिनी तरफ की हड्डी टूटकर लटक गयी। मुझे यहाँ के सुप्रसिद्ध ‘कलकत्ता हास्पिटल’ में ले जाया गया। दूसरे दिन वहाँ के डॉक्टरों ने मेरे घरवालों को मुझे आखिरी बार आकर देख लेने के लिए कहा। यह जानकर कोलकाता आश्रम में उपस्थित 300 साधक भाई-बहनों एवं मेरे घरवालों ने मेरे जीवन की रक्षा के लिए पूज्य बापू जी से प्रार्थना की एवं सामूहिक रूप से 21 बार ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप किया। बापूजी की कृपा से मैं मौत के मुँह से बाहर आ गया, मुझे दूसरा जन्म मिला है। मुझ पर राहू ग्रह की बाधा चल रही है और वह कई वर्षों तक चलेगी ऐसा एक मशहूर ज्योतिषी ने 15 वर्ष पहले मुझे बताया था। उनके अनुसार अभी भी राहु के प्रभाव के कारण मेरा कुछ बुरा वक्त बाकी है। मैंने दीक्षा लेने से पूर्व 11 वर्षों तक कामकाज में तथा और भी कई प्रकार से तकलीफें सहन कीं। मगर पूज्य बापू जी से दीक्षा लेने के बाद मेरा काम ठीक चल रहा है। मुझे हर विकट परिस्थिति में ऐसा एहसास होता रहा है कि कोई दैवी शक्ति मेरी मदद कर रही है और मेरे कष्टों का निवारण कर रही है। अब मुझे एकदम निश्चिंतता महसूस होती है। पहले मैं करीब 20-25 ज्योतिषियों के पास जाता था। हर कोई ग्रहबाधा की बात कहते है। मगर बापू जी से दीक्षा लेने के बाद मुझे कभी भी ज्योतिषियों के पास जाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, न कभी इसका ख्याल ही आया। आत्मज्ञान एवं योग-सामर्थ्य दोनों का अनोखा संगम जिनमें है, ऐसे मेरे सदगुरुदेव की शरण में आने वालों की कठिनाइयाँ तथा विपत्तियाँ छू हो जाती हैं और उनकी समझ बहुत ऊँची हो जाती है। पूज्य बापू जी का सत्संग सुनने से व्यक्ति देहभाव से ऊपर उठ जाता है। तन-मन तक ही जिनका प्रभाव रहता है वे बेचारे ग्रह उसे क्या हानि पहुँचा सकेंगे ? वे तो उसके अनुकूल होने में ही अपना अहोभाग्य समझेंगे।

राकेश अरोरा, पी-808, लेक टाउन, फर्स्ट फलोर
ब्लाक – ए, कोलकाता, – 89
ऋषि प्रसाद, मार्च 2005, पृष्ठ संख्या 29, अंक 147

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मिली बीमारी से मुक्ति और प्रमोशन की युक्ति

डॉक्टर द्वारा मुझे हलका हार्टअटैक आया बताने पर मैं आगरा में आई.सी.यू. में भर्ती हो गया और 39 दिन की छुट्टी लेनी पड़ी, जिसके कारण मैं हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार वार्षिक कार्य नहीं कर पाया। तत्कालीन जिला जज ने असंतुष्ट होकर मेरी गोपनीय चरित्रावली खराब कर दी और मैं मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट से अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति से वंचित हो गया। मेरे एक भाई की हार्ट अटैक से मृत्यु हो चुकी है, जबकि 2 अन्य भाइयों की बाई पास सर्जरी हो चुकी है। उक्त परिस्थितियों में मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गया था। उसके कुछ समय बाद से मैं रोज प्रातः टी.वी. पर पूज्य गुरुदेव के प्रवचन सुनने लगा। वर्ष 2000 में मैंने गुरुपूर्णिमा महोत्सव पर भोपाल आकर दीक्षा ली।
डॉक्टरों ने मेरे पारिवारिक इतिहास को देखते हुए मुझे एन्जियोग्राफी कराने की सलाह दी किंतु मैं ऑपरेशन के नाम से ही भयभीत था। पूज्य गुरुदेव भी हृदयरोग के लिए सर्जरी के बदले अन्य उपचार समय-समय पर बताते रहते हैं इसलिए मैं बाईपास सर्जरी नहीं कराना चाहता था। एस्कार्ट हास्पिटल, दिल्ली के ऑपरेशन थियेटर में एन्जियोग्राफी के समय मैंने मन-ही-मन सदगुरूदेव को पुकारा और ऑपरेशन टालने की प्रार्थना की क्योंकि मुझे विश्वास था कि मुझे भी हृदयरोग है। जब एन्जियोग्राफी की रिपोर्ट आयी तो एक आर्टरी में मात्र 20 % रुकावट निकली, जो 45 वर्षीय व्यक्ति के लिए सामान्य बात है। सदगुरुदेव की कृपा से मेरा ऑपरेशन टल गया। मेरा रुका हुआ प्रमोशन भी अप्रत्याशित रूप से पूज्य गुरुदेव ने करवा दिया क्योंकि गुरुदेव की अमृतवाणी ने मुझमें इतना आत्मविश्वास भर दिया कि फिर मैंने अपना न्यायिक कार्य बहुत अच्छी श्रेणी का करके दिखाया। मुझे दो अच्छी गोपनीय चरित्रावली की आवश्यकता थी और जो प्रमोशन मीटिंग 1 वर्ष पहले होने वाली थी, वह गुरुदेव की कृपा से टल गयी। अतः जब मीटिंग हुई तब तक मुझे दो अच्छी ‘सी.आर.’ मिल चुकी थी। इस प्रकार पूज्य गुरुदेव में आस्था रखने के कारण मुझे न केवल बीमारी से मुक्ति मिली बल्कि प्रमोशन के नुकसान की भी भरपाई हो गयी। परम पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा से अब मन शांत रहता है और सांसारिक हानि-लाभ ज्यादा प्रभावित नहीं करते हैं। सदगुरुदेव की कृपा का मैं सदैव ऋणी रहूँगा।

के.पी.सिंह
(अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश)
सोनकच्छ जिला देवास (मध्य प्रदेश)
ऋषि प्रसाद, नवम्बर 2006, पृष्ठ संख्या 31, अंक 167

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