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‘बाल संस्कार’ पुस्तक से….

मेरा नाम ऐशवर्य तिवारी है। मैं कक्षा चार का छात्र हूँ। मेरी माँ पूज्य बापू जी द्वारा दीक्षित है। उसने मुझे आश्रम से प्रकाशित पुस्तक बाल संस्कार पढ़ने को दी। उसमें लिखे प्रयोग करने से मेरी स्मरणशक्ति बढ़ी है। पहले मैंने पहली कक्षा में 78 % , दूसरी में 80 % अंक प्राप्त किये थे, परंतु अब गुरुदेव की कृपा से तीसरी कक्षा में 90 % अंक प्राप्त किये।

ऐश्वर्य तिवारी
ऋषि प्रसाद, नवम्बर 2003, पृष्ठ संख्या 29, अंक 131

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मंत्रदीक्षा के सुन्दर परिणाम

बीज गणित के दो नये सूत्र खोजे-

मैंने पूज्य बापू जी से सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा ली है। मैं ‘लैंसर्स सीनियर सैकेण्डरी विद्यालय, सिकंदराबाद, जिला बुलन्दशहर’ का छात्र हूँ। पूज्य बापू जी हमारे विद्यालय को दो बार अपने चरण कमलों से पवित्र कर चुके हैं। हमारी प्रधानाचार्या भी बापू जी की शिष्या हैं और पूज्य बापू जी के द्वारा दिये गये दिव्य संस्कारों से हम बच्चों को पोषित करती रहती हैं। पूज्य बापू जी के आशीर्वाद और माँ के प्रोत्साहन से गणित में कमजोर होते हुए भी मैंने खोज प्रारम्भ की और सफल हुआ। अखबार वालों ने भी इस खोज की प्रशंसा की। अगर पूज्य सदगुरुदेव का सत्संग, दीक्षा व आशीर्वाद न मिलता तो यह सफलता सम्भव न थी।

a2+b2 = (a+b)(a+b-2ab) when a ≠ -b
a+b
a2+b2 = (a-b)(a-b+2ab) when a ≠ b
a-b
पूज्य बापू जी की कृपा से उपरोक्त दो सूत्रों को ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ द्वारा प्रमाणपत्र मिल चुका है और अन्य चार सूत्रों पर कार्य कर रहा है। मुझे उम्मीद है कि गुरुदेव की कृपा से आगे भी सफलता जरूर मिलेगी।

अनमोल गर्ग
बिलासपुर, जिला गौतमबुद्धनगर (उत्तर प्रदेश)
ऋषि प्रसाद, जुलाई 2006, पृष्ठ संख्या 31, अंक 163

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मंत्रदीक्षा व ध्यान के प्रभाव से सफलताएँ

मैंने वर्ष 2002 में पूज्य बापू जी से सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा ली और उसी वर्ष एम. कॉम.(फर्स्ट ईयर) की परीक्षा में 80.5 % अंक प्राप्त किये, तत्पश्चात् प्रतिष्ठित एपीजे इंस्टीच्यूट,ग्रेटर नोयडा, से एम.बी.ए. की डिग्री से प्रथम श्रेणीसहित प्राप्त की। यह बापू जी की कृपा एवं सारस्वत्य मंत्र से उत्पन्न एकाग्रता का परिणाम ही था कि ट्रैनी बैंक अधिकारी का पदभार संभालते हुए, समय के अति अभाव के बावजूद भी मैंने एक प्राइवेट छात्र के रूप में एम. कॉम. ( फाइनल ) की परीक्षा 70 % अंकों से उत्तीर्ण की, साथ ही फ्लाइंग ऑफिसर पद की आल इंडिया स्तर की प्रतियोगी परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। नवम्बर 2006 में वायुसेना सिलेक्शन बोर्ड, बनारस द्वारा ली गयी विभिन्न परीक्षाओं एवं कठिन साक्षात्कार परीक्षा में भी मैंने मंत्रदीक्षा एवं पूज्य बापूजी के ध्यान के अदभुत प्रभाव से लाखों परीक्षार्थियों में से छँटकर करीब 300 प्रतियोगियों और उनमें से भी कुल छः चयनित उम्मीदवारों में स्थान पाने में सफलता प्राप्त की। समस्त सिलेक्शन बोर्डों द्वारा चयनित समस्त उम्मीदवारों की अंतिम रूप से बनी मेरिट सूची में भी स्थान प्राप्त कर मैंने वायुसेना एकेडमी ज्वाइन की और फ्लाइंग ऑफिसर का पद प्राप्त किया। मैंने बापू जी से मन ही मन प्रार्थना की कि, ‘हे बापू जी ! मेरी नियुक्ति ऐसे स्थान पर हो जाय जहाँ आपका आश्रम हो तथा सत्संग-लाभ मिलता रहे।’ और बापू जी की अपार कृपा का ही यह परिणाम है कि
आज मैं बड़ौदा एयर फोर्स स्टेशन पर नियुक्त हूँ। यहाँ पर मैं ही नहीं, मेरे माता-पिता जी भी आकर पूज्य बापू जी का दर्शन सत्संग लाभ प्राप्त करते हैं। उल्लेखनीय होगा कि मेरे साथ बड़ी दीदी डॉ. अनुपमा सिंह ने आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने से पूर्व तथा छोटा भाई कुँवर अभिषेक सिंह, जो कि अब मैनेजर है, ने लंदन (इंग्लैंड) से आकर बापूजी से दीक्षा ग्रहण की। हम सभी बापू जी के साधक के रूप में संतुष्ट हैं, खुश हैं। पूजनीय बापू जी से आगे भी
प्रार्थना है कि मेरी बापू जी के श्रीचरणों में श्रद्धा भक्ति तथा सेवा भावना बनी रहे।

अनुराधा सिंह
फ्लाइंग ऑफिसर, बड़ौदा (गुजरात)
स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2009, अंक 193, पृष्ठ संख्या 29

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मुझको जो मिला है वो तेरे दर से मिला है……… भव्या पंडित

पूज्य बापू जी के चरणकमलों में मेरे कोटि-कोटि प्रणाम !

मेरे माता जी ने मेरे बाल्यकाल में पूज्य बापू जी को मेरा फोटो दिखाया था, जिस पर बापू जी ने बड़े स्नेहपूर्वक अपना हाथ रखा था। मानो उस फोटो के माध्यम से बापू जी का आशीषभरा हाथ मेरे सिर पर आया और तब से मेरे जीवन में निरंतर प्रगति होती रही। मन ही मन उस छोटी अवस्था में ही मैंने पूज्य बापू जी को अपना गुरू मान लिया था। 1998 में मात्र 7 वर्ष की उम्र में मैंने अपने भाई के साथ सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा प्राप्त की। नियम से मंत्रजप का प्रभाव धीरे-धीरे सामने आने लगा। पढ़ाई में तो अच्छे अंक आते ही थे लेकिन संगीत की जिस प्रतियोगिता में भी जाती थी, प्रथम पारितोषिक लेकर आती थी। मुंबई आने पर भी मैं विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही और कई सारे पुरस्कार प्राप्त करती रही।
सन् 2001 में मुझे स्टार टी.वी. पर आयोजित कार्यक्रम में विशेष पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। सन् 2004 में मुझे ई-टी.वी. (उर्दू) पर गजलों के कार्यक्रम ‘गजल सरा’ में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। मुझे सन् 2006 का बाल श्री पुरस्कार मिला, जो कि भारत सरकार की ओर से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए सर्वोच्च पुरस्कार है।
नवम्बर 2007 में 15वें इन्टरनेशनल चिल्ड्रेन्स फिल्म फेस्टिवल, हैदराबाद मे मुझे बालिका के रूप में आमंत्रित किया गया। उस प्रदेश के 4 बाल कलाकारों के साथ शेष भारत से मैं अकेली ही थी। और 2008-2009 में आया इन्डियन आयडल-4. पूज्य बापू जी की कृपा देखिये कि ऑडिशन में मेरा चयन हुआ गुरूवार को। थिएटर राउंड के अंतिम चरण के बात टॉप-30 में चयन हुआ ‘गुरू पूर्णिमा’ के दिन। इसके बाद के सत्र पब्लिक वोटिंग पर निर्भर करते थे। किसी भी क्षेत्र (प्रांत) और किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रोत्साहन के बिना मैं टॉप-6 तक पहुँची तो यह गुरूकृपा नहीं तो और क्या है? गायन क्षेत्र के प्रतिष्ठित निर्णायकों ने मेरे गायन की खुले दिल से प्रशंसा की।
यह सब गुरूदेव के आशीर्वाद एवं गुरूदीक्षा का ही प्रभाव है।

भव्या पंडित, मुंबई।
स्रोतः ऋषि प्रसाद, अंक 196, अप्रैल 2009, पृष्ठ संख्या 30

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विश्वस्तर पर प्रथम स्थान

सारस्वत्य मंत्र का चमत्कार
मेरे पुत्र सुजित (उम्र 8 साल) ने पूज्य बापू जी से सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा ली है। वह हर रोज निष्ठापूर्वक उसका जप करता है। अगस्त 2006 में आयोजित ‘इंटरनेशनल इन्फोर्मेटिक्स ऑलम्पियाड, कम्पयूटर’ की परीक्षा में पूरे भारत और विदेश से लगभग 15000 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। उसमें सुजित ने 100 में से 99 अंक प्राप्त किये और तीसरी कक्षा में विश्व स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया है। सन् 2005 की दिवाली में पूज्य गुरूदेव ने सुजित की ओर देखते हुए कहा थाः “अभी इसकी पढ़ाई उत्तम ढंग से करवानी है, इस पर विशेष ध्यान दो।” तबसे हम गुरुदेव की दी हुई सेवा समझ के सुजित की ओर विशेष ध्यान दे रहे हैं। हम सब इतना ही चाहते हैं कि गुरुदेव की कृपा से हमारी आध्यात्मिक उन्नति होती रहे, हमारे हृदय में उनके प्रति प्रेम बढ़ता रहे। अंतिम सत्य प्राप्त करने के लिए हमें सुजित के साथ अपने चरणों में रखें।

पांडुरंग उगले, पूना (महाराष्ट्र)

स्रोतः ऋषि प्रसाद, मार्च 2007, अंक 171, पृष्ठ संख्या 31

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सारस्वत्य मंत्र से हुए अदभुत लाभ

मैंने दिसम्बर 1999 में छत्तीसगढ़ के भाटापारा गाँव में पूज्य गुरुदेव से सारस्वत्य मंत्र की

दीक्षा ली। तत्पश्चात मैं नियमित रूप से जप ध्यान-प्राणायाम करता था, जिससे मुझे बहुत लाभ हुआ।

पूज्य बापू जी की कृपा और सारस्वत्य मंत्रजप के प्रभाव से मुझे 12वीं की बोर्ड की परीक्षा में 84.6 %

विरेन्द्र कुमार कौशिक,

डोंगरगाँव, जिला राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)

ऋषि प्रसाद, अंक 125, पृष्ठ संख्या 30, मई 2003

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सारस्वत्य मंत्र से हुए अदभुत लाभ

मैंने 1998 में ‘विद्यार्थी उत्थान शिविर, सोनीपत’ में पूज्य गुरुदेव से सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा

ली। दीक्षा के बाद नियमित मंत्रजप करने से मैं इतना कुशाग्र बुद्धिवाला और स्वावलंबी हो गया

कि मैंने एक महीने में ही टयूशन छोड़ दी और स्वयं खूब मेहनत करने लगा। मैं स्कूल भी पैदल आने-

जाने लगा, जिससे मैंने स्कूल बस का किराया बचा लिया। मंत्रजाप के प्रभाव से मुझे 9वीं, 11वीं की

परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

12वीं की परीक्षा के समय मेरा स्वास्थ्य खराब होने के कारण मैं जप ठीक से नहीं कर सका,

फिर भी 79 % अंकों से पास हुआ। उसके बाद इंजीनियरिंग की परीक्षा में भी उत्तीर्ण रहा।

डी-234, वेस्ट विनोदनगर, दिल्ली

ऋषि प्रसाद, अंक 125, पृष्ठ संख्या 30, मई 2003

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