ब्लड कैंसर से मुक्ति

जनवरी 2002 में मेरे बड़े पुत्र को बुखार आया था। डॉक्टरों को दिखाया था तो किसी ने मलेरिया कहकर दवाइयाँ दीं तो किसी ने टायफाईड कहकर इलाज शुरु किया। दवा लेने से शरीर नीला पड़ गया और सूज गया। शरीर में खून की कमी होने से छः बोतलें खून चढ़ाया गया। इंजेक्शन देने से पूरे शरीर को लकवा मार गया। पीठ और पेट का एक्स रे लिया गया। डॉक्टरों ने उसे वायु का बुखार तथा रक्त का कैंसर बताया और कहा कि उसके हृदय का वाल्व चौड़ा हो गया है। ज्यों-ज्यों इलाज किये, त्यों-त्यों मर्ज बढ़ा दिया। यह है अंग्रेजी दवाओं और इंजेक्शनों का काला मुँह ! फिर भी हम चेतते नहीं। अब हम हिम्मत हार गये। गुरु जी के सिवाय कोई सहारा नहीं था। हमने पूज्य श्री की कुटिया की परिक्रमा की एवं श्री आसारामायण का पाठ किया। गुरुजी की करुणा-कृपा बरसी और 18 दिनों में ही मेरा पुत्र चलने फिरने लगा। अब वह पूर्णतया ठीक हो चुका है। मैं उन महापुरुष की जीवनगाथा को बार-बार नमन करता हूँ,जिसके श्रद्धा-संयुक्त पाठ से मेरे पुत्र को जीवनदान मिल सका और भक्त भाइयों से प्रार्थना करता हूँ कि वे नित्य इसका मंगलमय पाठ किया करें।

एन.डी.चावला
प्रसिद्ध उद्योगपति
सेक्टर 35, चण्डीगढ़

ऋषि प्रसाद, पृष्ठ 30, अंक 133, जनवरी 2004

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