मंत्रजप से मृत्यु के मुँह से बाहर

18 अक्तूबर 2006 को मेरी माँ लक्ष्मीबाई सिद्धप्पा हट्टी, उम्र 50 वर्ष के पेट में दर्द होने लगा। हम उन्हें अस्पताल में ले गये। आँतों में छेद हुआ है इसलिए शीघ्र ऑपरेशन की आवश्यकता बताकर डॉक्टरों ने दो लाख रूपये जमा करने के लिए कहा। दो घंटे ऑपरेशन चला। ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक माँ होश में नहीं आयीं। उन्हें कृत्रिम श्वसन तंत्र लगाया गया था। जब दस दिन तक माँ होश में नहीं आयीं, तब कई बार पूछने पर डॉक्टरों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बतायाः ‘आपरेशन के समय अनेस्थेशिया (बेहोशी की दवा) अधिक देने के कारण मरीज कोमा में चला गया है।’हम माँ को दूसरे डॉक्टर के पास ले गये, जिन्होंने माँ का सी.टी. स्कैन करने के बाद बताया, कि अब कुछ नहीं हो सकता। दोनों जगह से निराश होकर मरता क्या नहीं करता – हम माँ को घर ले आये और अमदावाद आरोग्य केन्द्र से संपर्क किया। उन्होंने हमें सिर पर तिल के तेल से मालिश करते हुए कोमा से बाहर लाने वाला खास मंत्र जपने के लिए दिया। मंत्र का प्रतिदिन एक घंटा जप करने की व हाथ पैरों के तलुओं में सरसों के तेल से मालिश करने की सलाह दी। विधिवत् मालिश एवं जप शुरू करने के एक घंटे के बाद ही माँ कोमा से बाहर आ गयीं। छठे दिन से वे बोलने लगीं व दसवें दिन से उन्होंने अन्न सेवन शुरू कर दिया। अब उनका मस्तिष्क पूर्णतः स्वस्थ है। अब वहाँ के डॉक्टर कहते हैं कि यह एक चमत्कार है। यह सब तो पूज्य गुरू देव की असीम कृपा का फल है।

श्री अरूण सिद्धप्पा हट्टी,
बेलगाँव, कर्नाटक
स्रोतः ऋषि प्रसाद, अप्रैल 2007, पृष्ठ संख्या 27, अंक 172

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One thought on “मंत्रजप से मृत्यु के मुँह से बाहर

  1. this happens only in bapuji’s darbar…… and never heared and never be heared anywhere…. jai ho sadguru dev ki……

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