मै मोहनलाल यादव पेशे से वकील हूँ ! सन १९९३ में बापूजी से दीक्षा लेने के उपरांत शादी के १६ वर्ष बाद बापूजी के आशीर्वाद से मुझे क्रमशः दो पुत्रो की प्राप्ति हुई ! बड़े पुत्र रामकृष्ण को हमने पढाई के लिए छिंदवाडा गुरुकुल में रखा था, जहाँ बापूजी को बदनाम करने के लिए सदयंत्र करके २९-०७-२००८ को उसकी हत्या करवा दी गयी थी ! इस बात को मीडिया द्वारा खूब उछाला गया था परन्तु हमे अपने गुरुदेव पर पूरा विश्वाश था ! रजोकरी (डेल्ही) में हजारो साधको के बीच दिनांक २-८-२००८ को पूज्य बापूजी ने हमे आशीर्वाद देते हुए कहा की ‘ फिक्र मत कर ,रामकृष्ण पुनः तेरे घर आएगा !’ और हुआ भी ऐसा ही ! निंदको कुप्रचारको के मुह पर करारा तमाचा झड़ते हुए पूज्य बापूजी के आशीर्वाद के फलस्वरूप दिनांक ३१-०८-२०१० को मेरी धर्मपत्नी ने एक बालक को जन्म दिया , जिसकी शक्ल रामकृष्ण से हू- बहू मिलती है ! पैदा होने के एक घंटे बाद जब हमने पूज्यश्री के निर्देशानुसार उसके जिव्हा पर “ॐ” लिखने के लिए कहा : “बेटा रामकृष्ण जीभ बहार निकालो !” तो आश्चर्य ! कि हमारे इतना कहते ही उसने जीभ बहार निकाल दी और हमने सोने कि सलाई से ‘ॐ’ लिखा ! जब भी हम उसको ‘रामकृष्ण’ के नाम से पुकारते है तो वह तुरंत कुछ न कुछ प्रतिक्रिया जरुर करता है ! मेरे घर बापूजी ने रामकृष्ण कि आत्मा को पुनः वापस भेजकर मेरे ऊपर जो उपकार किया है, उसे मै कभी नहीं भूल सकता ! यह दुनिया के लिए बापूजी के द्वारा किया गया एक चमत्कार है किन्तु मेरे लिए यह बापूजी द्वारा दिया गया प्रसाद है ! कुप्रचारको द्वारा एडी-चोटी का जोर लगाये जाने पर भी साधको कि श्रध्दा न हिली , बल्कि वह नित्य निरंतर बढती जा रही है ! ये कुछ भी करे ,कुछ भी बके परन्तु सर्वसमर्थ गुरुदेव पूज्य बापूजी पर हमारा अटूट विश्वाश था , है और रहेगा ! उसे ये तो क्या इनके बाप भी नहीं हिला सकते !
पूज्य बापजी कि असीम करूणा कृपा देखकर कुछ माह पहले ‘ऋषि प्रसाद ‘ में छपा मुण्डकउपनिषद का एक श्लोक याद आया :
” यं यं लोकं मनसा संविभांति,विशुध्दसत्वः कामयते यांश्च कामन !
तं तं लोकं जयते तांश्च कामां- स्तस्मादात्मगयम हार्चयेद भूतिकामः !! “
‘ऐश्वर्य कि इच्छा करने वाला पुरुष आत्मज्ञानी कि सेवा पूजा करे , क्यूंकि वह विशुध्दचित आत्मवेता (अपने शिष्य या भक्त के लिए) मन से जिस जिस लोक कि भावना करता है और जिन जिन भोगो को चाहता है ,वह (शिष्य या भक्त ) उसी उसी लोक और उन्ही उन्ही भोगो को प्राप्त कर लेता है !’ (मुण्डकउपनिषद : ३.१.१० )
पूज्य बापूजी केवल सदगुरू ही नहीं वरन अवतारी महापुरुष है ! उनके श्रीचरणों में कोटि कोटि प्रणाम !
मोहनलाल यादव
वडाला (पूर्व) , मुंबई
मो. ९२२४२१४७५६





